
मुंगेली:
भारतीय जनता पार्टी ने मुंगेली जिले के मंडल अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है, लेकिन लोरमी मंडल का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि लोरमी मंडल का नाम क्यों अटका और इसके पीछे की वजह क्या है।
लोरमी में सहमति नहीं बनी:
सूत्रों के अनुसार, लोरमी मंडल में मंडल अध्यक्ष के चयन को लेकर नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाई है। कई दावेदारों के होने से मामला जटिल हो गया है। गुटबाजी और आपसी खींचतान के कारण अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।
स्थानीय राजनीति बनी रोड़ा:
लोरमी मंडल में अध्यक्ष पद के लिए कई स्थानीय नेताओं ने दावेदारी पेश की है। इनमें से कुछ नेताओं को वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है, जबकि कुछ को कार्यकर्ताओं का। यही वजह है कि संगठन को अंतिम निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है।
संगठन का प्रयास जारी:
बीजेपी के जिला और प्रदेश स्तर के संगठन लोरमी में सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जल्द ही लोरमी का नाम भी सूची में जोड़ दिया जाएगा।
गुटबाजी बनी चुनौती:
लोरमी में पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और आंतरिक कलह संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर सही समय पर सहमति नहीं बनी, तो यह 2024 के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
प्रमुख बिंदु:
मुंगेली के मंडल अध्यक्षों की सूची जारी।
लोरमी मंडल का नाम अटका।
सहमति न बनने से सूची में देरी।
स्थानीय गुटबाजी बनी बाधा।
पार्टी जल्द समाधान निकालने में जुटी।
पार्टी का बयान:
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि संगठन में सभी के हितों का ध्यान रखा जाएगा और लोरमी मंडल के अध्यक्ष का नाम जल्द ही घोषित किया जाएगा।


