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बिलासपुर। मंगला चौक स्थित सेंट पलोटी स्कूल की शुक्रवार सुबह हमेशा की तरह शांत थी। बच्चे अपनी कक्षाओं में थे, शिक्षक पढ़ा रहे थे। लेकिन तभी… एक तेज धमाका! चीख-पुकार! अफरातफरी!
बाथरूम से निकली एक 10 साल की बच्ची, जो दर्द से कराह रही थी। उसकी स्कूली ड्रेस झुलस चुकी थी। शिक्षक और छात्र घबराए हुए बाथरूम की ओर भागे, लेकिन वहां जो दिखा, उसने सबको चौंका दिया।
बाथरूम में रहस्यमयी धमाका – हादसा या साजिश?
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जांच शुरू हुई तो पता चला कि बाथरूम में कोई आम विस्फोट नहीं हुआ था, बल्कि यह एक ख़तरनाक रासायनिक प्रतिक्रिया का नतीजा था। पुलिस और फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सबको सन्न कर दिया – धमाका सोडियम मेटल से हुआ था!
तीन दिन से रची जा रही थी खौफनाक साजिश!
स्कूल प्रिंसिपल फादर सुनीत कुमार के अनुसार, कुछ छात्राएं तीन दिनों से इस शरारत की योजना बना रही थीं। सोडियम मेटल स्कूल में कैसे आया? किसने इसे वहां रखा? क्या कोई इसे किसी के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता था?
जांच में यह भी सामने आया कि बाथरूम में सोडियम मेटल पहले से रखा गया था। जैसे ही बच्ची ने वहां पानी डाला, रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई और जोरदार धमाका हो गया।
सोडियम मेटल – खतरनाक खेल का हथियार?
रसायनशास्त्री डॉ. हर्षा शर्मा ने बताया कि सोडियम अत्यधिक ज्वलनशील होता है। पानी से संपर्क में आते ही यह आग पकड़ सकता है या विस्फोट कर सकता है। सवाल यह था कि यह मेटल स्कूल में आया कैसे?
स्कूल की प्रयोगशाला में इस तरह के रसायनों की अनुमति नहीं थी। तो फिर यह ख़तरनाक तत्व यहां तक कैसे पहुंचा? क्या यह सिर्फ़ एक बचकानी शरारत थी या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश छिपी थी?
अभिभावकों में आक्रोश – स्कूल प्रशासन सवालों के घेरे में!
घटना के बाद अभिभावक गुस्से में हैं। कोई कह रहा था, “हमारे बच्चों की सुरक्षा का क्या?” तो कोई चिल्ला रहा था, “यह हादसा नहीं, लापरवाही है!”
पुलिस ने संदिग्ध छात्राओं से पूछताछ शुरू कर दी है। कुछ ऐसे नाम सामने आ रहे हैं, जो स्कूल में काफी समय से अजीब हरकतें कर रहे थे। क्या वे इस धमाके के पीछे हैं? या कोई और छिपा हुआ चेहरा इस साजिश का मास्टरमाइंड है?
रहस्य गहराता जा रहा है…
जांच जारी है। पुलिस के पास अब कई सवाल हैं—क्या यह सिर्फ़ एक नासमझी भरी शरारत थी? या किसी को चोट पहुँचाने की एक सोची-समझी योजना? क्या स्कूल की सुरक्षा में कोई बड़ी चूक हुई थी?
सच्चाई जो भी हो, लेकिन यह घटना एक चेतावनी थी – स्कूल में बच्चों की सुरक्षा से समझौता अब और नहीं!