अचानकमार अभ्यारण्य के सुदूर वनग्राम बिसौनी में ‘प्रयास वनवासी पाठशाला’ के बच्चों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर का सफल आयोजन

बिसौनी (अचानकमार अभ्यारण्य), । ‘प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन’ द्वारा संचालित प्रयास वनवासी पाठशाला में 25 सितंबर, गुरुवार को एक प्रेरणादायक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में प्रख्यात सर्जन डॉ. रूपेश साहू (एम एस सर्जन) ने अपनी टीम के साथ सुदूर वनग्राम बिसौनी के 61 बैगा बालक-बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया।


डॉ बाइक में निकले: समर्पण और संघर्ष की यात्रा


डॉ. रूपेश साहू और उनकी धर्मपत्नी का बच्चों के प्रति प्रेम और सेवाभाव अतुलनीय रहा। वे अपने मात्र एक साल के बच्चे को साथ लेकर बेहद दुर्गम क्षेत्र की यात्रा पर निकले। अचानकमार अभ्यारण्य के घने जंगल, उबड़-खाबड़ रास्ते, और नदी-नालों को पार करते हुए उन्होंने यह रास्ता बाइक से तय किया।


बरसात के मौसम में कीचड़ भरे रास्ते पर कई बार उन्हें बाइक से उतरकर पैदल चलना पड़ा और एक-दो जगह वे गिर भी गए। बच्चों से मिलने की उत्सुकता ने उन्हें इन सभी खतरों की परवाह नहीं करने दी। संस्था के सदस्यों के अनुसार, डॉ. साहू और उनकी जीवन संगिनी की सेवाभाव, त्याग और समर्पण की भावना अतुलनीय थी। लगभग एक घंटे का कठिन सफर तय करने के बाद यह परिवार बच्चों के बीच पहुंचा।


स्वास्थ्य परीक्षण और मुख्य निष्कर्ष
डॉ. साहू ने बच्चों के पास पहुंचते ही स्वास्थ्य जांच आरंभ की। शिविर में कुल 61 बैगा बालक-बालिकाएं उपस्थित थे।
जांच के दौरान पाया गया कि सर्वाधिक बच्चे सर्दी और खांसी से ग्रस्त थे।
स्वच्छता जागरूकता के अभाव के कारण दाद, खाज, और खुजली जैसे चर्मरोगों से ग्रसित बच्चों की संख्या भी काफी अधिक थी।
डॉ. रूपेश साहू ने तुरंत राहत के लिए बच्चों को आवश्यक दवाइयां वितरित कीं और यह सुनिश्चित किया कि जो दवाइयां तत्काल उपलब्ध नहीं थीं, उन्हें किसी माध्यम से बच्चों तक अतिशीघ्र पहुंचाया जाएगा।



स्वास्थ्य जांच के पश्चात, डॉ. साहू और उनकी धर्मपत्नी ने बच्चों के लिए लाई गई शैक्षणिक सामग्री और मिष्ठान का भी वितरण किया, जिससे बच्चों के चेहरे पर खुशी आ गई।
‘प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन’ ने इस स्वास्थ्य जांच शिविर को सफल बनाने के लिए समाजसेवी आजुराम मरावी, शिक्षक शिवकुमार मरावी, और श्रीमती शिवकुमारी मरावी के विशेष योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
यह शिविर दर्शाता है कि यदि हर चिकित्सक और शिक्षित व्यक्ति में ऐसा सेवाभाव और समर्पण आ जाए, तो समाज और धरती को बेहतर बनाया जा सकता है।

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