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प्लास्टिक कचरे पर कार्रवाई के एक सप्ताह बाद ही नई लापरवाही उजागर – खुले में फेंकी गई एक्सपायर्ड दवाईयां और मेडिकल वेस्ट



🔴 खुले में बायोमेडिकल वेस्ट फेंका जाना बना गंभीर खतरा

नियमों की उड़ रही धज्जियाँ – स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संकट

मुंगेली, 18 जून 2025 |
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को लेकर हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा सख्ती बरतने के महज कुछ दिनों बाद ही मुंगेली जिले के ग्राम रेहुंटा में एक और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। इस बार खुले में बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाइयां और उपयोग किए गए मेडिकल उपकरण फेंके जाने का मामला उजागर हुआ है। यह न केवल स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि क्षेत्र में जनस्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरे की घंटी है।


रेहुंटा गांव जाने वाले मार्ग पर खाली पड़ी भूमि पर कई थैलों में सिरिंज, ड्रिप सेट, ग्लव्स, पट्टियां, इंजेक्शन और एक्सपायर्ड दवाइयां पाई गईं। न तो नगर पालिका की निगरानी थी और न ही स्वास्थ्य विभाग की कोई सतर्कता दिखाई दी।



खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकने के गंभीर नुकसान

1. संक्रमण का खतरा:
उपयोग की गई सिरिंज और पट्टियों में रोगजनक बैक्टीरिया और वायरस होते हैं, जो हवा और जमीन के संपर्क में आकर संक्रमण फैला सकते हैं।


2. बच्चों और जानवरों पर खतरा:
बच्चों या जानवरों के संपर्क में आने से जख्म, जहरीला असर और गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।



3. जल और मिट्टी प्रदूषण:
एक्सपायर्ड दवाओं के रसायन भूजल को दूषित करते हैं, जिससे लोगों को लंबे समय तक बीमारियाँ घेर सकती हैं।


4. कोविड जैसे संक्रमण फैलने का खतरा:
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षित मेडिकल वेस्ट से न केवल आम लोग, बल्कि हेल्थ वर्कर्स भी प्रभावित होते हैं।



बायोमेडिकल वेस्ट निपटान के नियम

भारत सरकार द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत निम्नलिखित दिशा-निर्देश अनिवार्य हैं:

🔹 सभी हॉस्पिटल, क्लिनिक, लैब और फार्मेसियों को बायो मेडिकल वेस्ट का पृथक संग्रह करना जरूरी है।
🔹 सभी संस्थानों को लाइसेंस प्राप्त ट्रीटमेंट प्लांट से अनुबंध करना होता है।
🔹 कचरे को रंग-कोडेड बैग्स (पीला, लाल, नीला, काला) में वर्गीकृत कर डिस्पोज किया जाना चाहिए।
🔹 नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जुर्माना और जेल का प्रावधान है।



नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब तक किसी मेडिकल दुकान या संस्थान की जांच नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता उजागर हो रही है।

ग्रामीणों की मांग



✅ दोषियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाए।
✅ सभी मेडिकल दुकानों, क्लिनिकों और फार्मेसियों का बायोमेडिकल डिस्पोजल रजिस्टर जांचा जाए।
✅ कचरे के स्रोत की फॉरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जाए कि यह वेस्ट कहां से आया।


बायोमेडिकल वेस्ट की यह लापरवाही न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण और पशु जीवन को भी गंभीर संकट में डाल रही है। यदि समय रहते प्रशासन सचेत नहीं हुआ तो यह स्थिति एक महामारी जैसी आपदा बन सकती है।

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