धान खरीदी से पहले बड़ा विवाद: कृषि विभाग ने कहा— “हमारी जिम्मेदारी किसान योजनाएं, न कि उपार्जन ड्यूटी”

मुंगेली।
खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो रही है। जिले में 66 समितियों के 105 उपार्जन केंद्रों पर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरे, GPS ट्रैकिंग, बायोमैट्रिक सिस्टम और विशेष मॉनिटरिंग टीम तैनात की गई है। किसानों के लिए पेयजल, छाया और बैठक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। टोकन कटना शुरू होने से किसानों में उत्साह दिख रहा है।

इसी बीच कृषि विभाग के अधिकारियों ने धान खरीदी के दौरान लगाई जा रही प्रशासनिक ड्यूटी का तीखा विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण मृदा विज्ञान अधिकारी और कृषि विकास अधिकारी ने संयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि उन्हें प्रभारी अधिकारी, नोडल अधिकारी और ट्रस्टेड पर्सन के रूप में ड्यूटी देना शासन के निर्देशों के विपरीत है।

अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग पहले से ही कई महत्वपूर्ण और समयबद्ध कार्यों में संलग्न है — जिनमें रबी फसल का लक्ष्य, पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 100% एग्री-स्टैक पंजीयन, पीएम फसल बीमा योजना के फसल कटाई प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और बीमा प्रोत्साहन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। उनका कहना है कि धान खरीदी की अतिरिक्त ड्यूटी से इन फ्लैगशिप योजनाओं पर गंभीर असर पड़ेगा।

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कृषि अधिकारियों को उपार्जन कार्य से मुक्त नहीं किया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कृषि अधिकारियों का तर्क है कि उनका मूल दायित्व किसान उत्पादन, बीज वितरण, मिट्टी परीक्षण और फसल बीमा जैसी योजनाओं पर केंद्रित है, न कि धान खरीदी संचालन पर।

प्रशासन तैयार, पर असंतोष बढ़ा
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेशों में कृषि विभाग के कई अधिकारियों को उपार्जन केंद्रों में प्रभारी और नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब जिले में यह बड़ा सवाल बन गया है कि क्या प्रशासन कृषि विभाग की मांगों पर पुनर्विचार करेगा या फिर निर्धारित तिथि के अनुसार सभी अधिकारी ड्यूटी पर पहुंचेंगे।

किसानों में भी स्थिति को लेकर चिंता है। उनका कहना है कि खरीदी प्रक्रिया निर्बाध चलनी चाहिए और विभागों के बीच के विवाद का असर उन पर नहीं पड़ना चाहिए।

धान खरीदी शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में कृषि विभाग के विरोध ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है। अब जिले में चर्चा का केंद्र यही है कि धान खरीदी की पारदर्शिता पर प्रशासन का ज़ोर भारी पड़ेगा या कृषि विभाग की चेतावनी। आने वाले दिनों में स्थिति कैसे बदलती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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