छत्तीसगढ़ में बर्खास्त बीएड (B.Ed) सहायक शिक्षकों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार सुबह, राजधानी रायपुर में शिक्षक अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के दौरान अचानक वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बंगले पर पहुंच गए। सुबह 5 बजे शिक्षक वहां नारेबाजी करने लगे।
मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। विरोध कर रही महिलाओं को भी जबरन बसों में बैठाया गया। एक महिला शिक्षक बस की खिड़की पर लटक गई, लेकिन पुलिस ने वाहन नहीं रोका। इस दौरान एक अन्य महिला शिक्षक, जो अपने दूध पीते बच्चे को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, उसके बच्चे को पुलिस ने गोद से छीन लिया।
बर्खास्तगी का मामला:
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31 दिसंबर 2024 को छत्तीसगढ़ सरकार ने आदेश जारी कर 3000 बीएड सहायक शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। शिक्षकों का आरोप है कि यह फैसला उनके भविष्य को अंधकार में डालने वाला है। वे समायोजन की मांग कर रहे हैं और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए कई दिनों से आंदोलनरत हैं।
विरोध का इतिहास:
प्रदर्शनकारियों ने इससे पहले बीजेपी कार्यालय का घेराव, जल समाधि और शव यात्रा जैसे विरोध प्रदर्शन किए। शनिवार को मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जबरन प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर रायपुर के आसपास घुमाया।
कांग्रेस का समर्थन:
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने शिक्षकों का समर्थन किया है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिक्षकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि मंत्री ओपी चौधरी को शिक्षकों की बात सुननी चाहिए।
शिक्षकों की मांग:
प्रदर्शनकारी शिक्षक बर्खास्तगी को रद्द कर समायोजन और स्थायी नौकरी की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया:
अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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