Chhattisgarh Times News: अबूझमाड़ मुठभेड़ पर गरमाई सियासत, भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार को दी नसीहत, बच्चों की सुरक्षा पर जताई चिंता



उपशीर्षक: पूर्व मुख्यमंत्री बघेल बोले – “नक्सलवाद के खात्मे की जल्दबाजी में निर्दोष आदिवासियों को न पहुंचे नुकसान

मुख्य समाचार:
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में 12 दिसंबर को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान चार बच्चों के घायल होने की घटना ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय पर निशाना साधते हुए राज्य सरकार को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

भूपेश बघेल का बयान:
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सवाल उठाया, “जब सुरक्षा बल नक्सलियों से लड़ रहे थे, तो ये बच्चे कैसे घायल हो गए? क्या यह वाकई मुठभेड़ थी या फिर निर्दोष लोगों की हत्या? भाजपा सरकार का फर्जी मुठभेड़ों का रिकॉर्ड पहले भी खराब रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और राज्य सरकार को सावधानी बरतने का निर्देश देना चाहिए।

बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को खत्म करने के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खात्मे की जल्दबाजी में निर्दोष आदिवासी बच्चों और ग्रामीणों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री कार्यालय को टैग कर इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।


पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि मुठभेड़ के दौरान माओवादी बच्चों को ‘मानव ढाल’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके कारण बच्चे घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, बच्चों को बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) के छर्रे लगे, जिससे उनके सिर, गर्दन और पीठ पर चोटें आईं।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा:
सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी और ग्रामीणों ने मुठभेड़ की सत्यता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि मारे गए लोगों में से पांच स्थानीय ग्रामीण थे, जो खेतों में काम कर रहे थे। सोनी सोरी ने इसे ‘फर्जी मुठभेड़’ करार दिया और कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

पुलिस का दावा – 7 नक्सलियों को मार गिराया
12 दिसंबर को नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर स्थित अबूझमाड़ के कल्हाजा-दोंदरबेड़ा गांव में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस ने दावा किया था कि मुठभेड़ में सात नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस का कहना है कि सभी सात नक्सलियों पर इनाम घोषित था।

Chhattisgarh Times की विशेष रिपोर्ट:
इस मुठभेड़ के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने न केवल भाजपा सरकार पर निशाना साधा बल्कि सुरक्षा अभियानों में बच्चों और आदिवासी ग्रामीणों की सुरक्षा की मांग की। आदिवासी कार्यकर्ता और ग्रामीणों के आरोप और पुलिस के दावे के बीच सच्चाई क्या है, यह जानने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।

Chhattisgarh Times News की विशेष रिपोर्ट।

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