

मुंगेली, 26 जुलाई 2025//महिला एवं बाल सुरक्षा, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला एवं पुलिस प्रशासन ने एक अभिनव पहल की है। जिला कलेक्टोरेट स्थित जनदर्शन कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम को ‘सामंजस्य कार्यक्रम’ नाम दिया गया है। इसके तहत टूटते परिवारों को जोड़ने और आपसी संवाद से रिश्तों में नजदीकी लाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर कलेक्टर कुन्दन कुमार, पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पांडेय तिवारी, जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय, अपर कलेक्टर मेनका प्रधान, जिला शिक्षा अधिकारी सी.के. घृतलहरे, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी संजुला शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी अंजुबाला शुक्ला और काउंसलर टीम मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 10 परिवारों के बीच संवाद स्थापित कर उन्हें पुनः एकजुट करने में सफलता मिली।

कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा कि पारिवारिक समस्याएं हर घर में होती हैं, लेकिन संवाद और समझदारी से उनका समाधान संभव है। मोबाइल, सोशल मीडिया और नशे को परिवार टूटने के बड़े कारणों में गिनाया। उन्होंने कहा कि हजारों ऑनलाइन मित्र कठिन समय में साथ नहीं होते, पर परिवार हमेशा साथ खड़ा रहता है।

पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कहा कि समय सबसे कीमती धन है। अगर रिश्तों को समय नहीं दिया गया, तो जीवन अधूरा रह जाता है। उन्होंने परिवार को सबसे बड़ा संबल बताया और कहा कि रिश्तों को संवाद और संवेदना से पोषित करना चाहिए।

जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय ने कहा कि जीवन के हर पड़ाव पर सामंजस्य जरूरी है। कई मुकदमे और झगड़े केवल संवाद की कमी से पैदा होते हैं। प्रशासन का प्रयास है कि इन्हें बातचीत से हल किया जाए।
अपर कलेक्टर निष्ठा पांडेय तिवारी ने कहा कि विवाह के लिए आने वाले कम उम्र के युवाओं में अक्सर पारिवारिक सामंजस्य की कमी देखी जाती है। मेनका प्रधान ने संवाद को हर समस्या का समाधान बताया।
जिला शिक्षा अधिकारी सी.के. घृतलहरे ने कहा कि विचारधारा, जीवनशैली, आर्थिक स्थिति और सामाजिक दबाव भी परिवार टूटने के कारण बनते हैं। मनुष्य समूह में जीने वाला प्राणी है, इसलिए बच्चों को संवाद और सामंजस्य के वातावरण में पालना चाहिए।

महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी संजुला शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
‘सामंजस्य कार्यक्रम’ टूटते रिश्तों को जोड़ने, संवाद की परंपरा को पुनर्जीवित करने और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश करने वाली पहल है। मुंगेली प्रशासन की यह कोशिश न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रेरक और मार्गदर्शक कदम साबित हो सकती है।


