दशरथ लाल अमरीका बाई आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोरमी में दीपदान कार्यक्रम आयोजित


मिट्टी के दीपक पंचतत्वों का प्रतीक:-त्रिलोक कोशले

राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के बैनर तले दीपावली पूर्व दीवाली मिलन संपन्न..

लोरमी: दशरथ लाल अमरीका बाई आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंधवा वि.ख.लोरमी जिला मुंगेली में दीपोत्सव पर्व के पूर्व दीपावली मिलन और दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा रंगोली,डांस,प्रश्नोत्तरी,दीपक सजाओ,थाली सजाओ,विविध खेल प्रतियोगिता संपन्न हुई।
तत्पश्चात विद्यालय के संचालक त्रिलोक कोशले प्राचार्य सी.एस. कोशले एवं समस्त स्टॉफ द्वारा भारत माता और खेत में लगे फसल का पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का विधि व शुभारंभ किया।
संचालक,प्राचार्य एवं सभी शिक्षक/शिक्षिकाओं और छात्र छात्राओ द्वारा दीपदान कर एक दूसरे को दीपावली पर्व की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित किए।
विद्यालय संचालक त्रिलोक कोशले ने दीपदान अवसर पर कहा कि अंधकार पर प्रकाश की जीत,बुराई पर अच्छाई और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत ” का प्रतीक है।
मिट्टी के दीपक पंचतत्वों का प्रतीक माने जाते हैं।मिट्टी और पानी से दीपक बनता है और दीपक जलाने पर अग्नि तत्व आ जाता है। बिना वायु के आग नहीं जल सकती।
मिट्टी के दीयों का अधिकाधिक हम सभी को उपयोग करना है जिससे हमारे कामगारों लोगों को उनकी मेहनत का परिणाम और हमारी प्राचीन परंपरा जीवंत रहे इसके लिए हमारी भावी पीढ़ी को जानने समझने की नितांत आवश्यकता है।
प्राचार्य चंद्रशेखर कोशले ने कहा कि मेरे हिसाब से दान देना सर्वोत्तम कार्य है,एक महान कार्य,दान किसको दिया जा रहा है यह देखना बहुत जरूरी है,दान यदि सुपात्र को दिया जा रहा है,तो मेरे हिसाब से इससे उत्तम कार्य कुछ भी नहीं, दान यदि कुपात्र को दिया जा रहा है तो उसका कोई अर्थ नहीं है ।
दान किसी सुपात्र को देने के बाद जो अलौकिक अनुभूति होती है आप उसकी कल्पना मात्र कीजिए ।
ठीक इसी प्रकार दीपदान करने का अलग महत्व और परंपरा है।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी गोविंद नवरंग ने दीपदान पर्व पर कहा कि इसका नाम संस्कृत शब्द दीपावली से लिया गया है, जिसका अर्थ है “रोशनी की पंक्ति।” यह त्यौहार आम तौर पर अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।
धनतेरस इसका उद्घाटन दिवस होता है।
जब हम बच्चे थे तो दीवाली त्यौहार का हम सभी भाई बहनों और बाल सखाओ को बेसब्री से इंतजार होता था घर में मां के हाथ से बने मिठाई और नई फसल से बनाए जाने वाले पारंपरिक फरा जो आज गढ़ कलेवा में एक अपनी अलग विशेष पहचान रखता है।
कार्यक्रम में व्याख्याता शिक्षिका सेवती साहू,विरेंद्र साहू,गजेंद्र गर्ग, राखी नेताम,राजीव कोशले,मधु मिरी,धनेश्वरी खांडे,मासूम कोशले,स्वयंसेवक छात्र-छात्राऐ क्रमशःचंद्रशेखर,किरण, सुखचरण,लुसेन,आकाश,रंजीता साहू,रंजीता खांडे,शिल्पी जांगड़े,झरना यादव,देवराज यादव,करीना टोंडे,दीपिका साहू,प्रियंका यादव,आदित्य,सचिन,आशीष,नवीन डाहिरे,निर्भय,रेणुका,अनामिका, अंजुला,विराट,विवेक,कामनी, लेश्मा, अमरप्रकाश,हितेश,पूनम,निधि, दिलीप,प्रेमलता,दुर्गा,धर्मेश इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

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