घर-घर में सजा मंडप, तुलसी का हुआ विवाह,दीपों से जगमगाए द्वार, तुलसी-शालिग्राम विवाह के लिए सजा आंगन

हिन्दू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी व सभी व्रतों में श्रेष्ठ देवउठनी एकादशी का पर्व सुकली में उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आंगन में तुलसी चौरा को विशेष रूप से सजाकर गन्ने का मंडप सजाया। उसके बाद पारम्परिक ढंग से माता तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ रचाया। भगवान विष्णु के सांकेतिक स्वरूप शालिग्राम और माता तुलसी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर मौसमी फल केला, सेव, मूंगफली, सिंघाड़ा एवं घरों में बनाए व्यंजन का भोग लगाया। छोटी दिवाली के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर घरों में रंगोली सजाई गई। दिए जलाकर रोशनी की गई। वहीं बच्चों द्वारा पटाखे फोड़े गए। राउत लोग गाय, भैंस को सोहाई बांधकर दोहा के साथ आशीष दिए। शास्त्रों में कार्तिक मास को सबसे पवित्र माना गया है। कार्तिक मास में ही धनतेरस, दिवाली और तुलसी विवाह जैसे पवित्र पर्व मनाए जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में जो लोग नियमानुसार तुलसी जी की पूजा अर्चना करते हैं उन पर भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही घर में तुलसी का होना बेहद शुभ माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है वहां कभी भी यमदूत प्रवेश नहीं करते। इस अवसर पर पूरा कुटुंब मिलकर गन्ने का प्रसाद प्राप्त किया। संयुक्त रूप से इस अवसर को बड़े उमंग से मनाया गया।

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