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शासन का आदेश बेअसर? मुंगेली CMHO ने जारी किया संलग्नीकरण आदेश, विभाग में मचा भ्रम

मुंगेली। छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा प्रदेशभर में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बाद मुंगेली जिले में एक नया आदेश विवाद और चर्चा का विषय बन गया है। शासन ने 12 मार्च 2026 को जारी आदेश में सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए थे, वहीं मुंगेली के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा 19 मार्च 2026 को जारी आदेश में कई कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर अब स्वास्थ्य विभाग में असमंजस और सवाल दोनों खड़े हो गए हैं।


जानकारों का कहना है कि जब शासन स्तर से स्पष्ट आदेश जारी कर संलग्नीकरण समाप्त करने की बात कही गई है, तब जिला स्तर पर इस प्रकार का आदेश जारी होना नियमों की व्याख्या और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़ा करता है। कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर प्रभावी आदेश कौन सा माना जाए—शासन का या जिला स्तर का।


इस विरोधाभासी स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग के भीतर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर शासन का निर्देश है कि सभी अधिकारी-कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना पर कार्य करें, दूसरी ओर जिला स्तर पर स्टाफ की कमी और कार्य प्रभावित होने का हवाला देकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है। ऐसे में यह मामला अब केवल प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन के निर्देशों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


CMHO शीला शाह ने दी सफाई
इस पूरे मामले में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शीला शाह से पक्ष लिया गया तो उन्होंने कहा—


“ये जो लेटर जारी हुआ है, वो पहले से ही TL की बैठक में बताया गया था कलेक्टर साहब को। क्योंकि जहां पर पोस्टिंग है वहां काम नहीं होता है, और कुछ जगह ऐसे हैं जहां काम हो रहा है लेकिन स्टाफ की कमी है। उसी को देखते हुए कलेक्टर साहब को संज्ञान में देकर यह आदेश निकाला गया है।”


CMHO की इस सफाई के बाद यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन ने स्थानीय जरूरत और स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की उपलब्धता को आधार बनाकर यह निर्णय लिया है। हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्थानीय प्रशासनिक आवश्यकता के नाम पर शासन के स्पष्ट निर्देशों से अलग आदेश जारी किया जा सकता है, या फिर इसके लिए शासन स्तर से विशेष अनुमति जरूरी थी।


फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पर शासन स्तर से कोई स्पष्टीकरण आता है या नहीं, और जिला स्तर पर जारी आदेश यथावत रहता है या उसमें संशोधन किया जाता है।

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