
मुंगेली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) न्यायालय, मुंगेली ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में पीड़िता के रिश्तेदार (मौसा) को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का भी आदेश दिया है।
न्यायालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला थाना जरहागाँव के अपराध क्रमांक 12/2050 से संबंधित है, जिसमें आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1)(b) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
घटना 31 जनवरी 2025 की है। पीड़िता अपने रिश्तेदारों के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। इसी दौरान आरोपी रिश्तेदार ने उसे बहला-फुसलाकर मोटरसाइकिल से सुनसान स्थान पर ले जाकर जबरन दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद मामला थाना जरहागाँव में दर्ज कराया गया।
पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, पीड़िता के बयान तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी का कृत्य अत्यंत गंभीर एवं निंदनीय है, जिससे नाबालिग की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए कठोर सजा सुनाई गई है।
इसके अतिरिक्त न्यायालय ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि पीड़िता को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए। इसमें से 1 लाख रुपये तत्काल प्रदान करने तथा शेष 4 लाख रुपये पीड़िता के वयस्क होने तक सुरक्षित बैंक खाते में जमा रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) न्यायालय, मुंगेली द्वारा पूर्ण की गई तथा 19 फरवरी 2026 को निर्णय सुनाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।
यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में सख्त न्यायिक रुख का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


