
बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में करीब दो दशक बाद बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में अहम निर्णय देते हुए अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने ₹1000 का जुर्माना भी लगाया है और राशि जमा नहीं करने पर 6 माह के अतिरिक्त कठोर कारावास का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने आरोपी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
🔴 2003 की सनसनीखेज वारदात
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रामअवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना मौदहापारा थाना के सामने हुई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी और इस हत्याकांड ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।
⚖️ हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
मामले में 2007 में निचली अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था। हालांकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा शामिल थे, ने पुनर्विचार के बाद निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।
🟡 सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई पुनः सुनवाई
पहले 2011 में कुछ याचिकाएं खारिज हो गई थीं, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने देरी को माफ करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था। इसी के बाद केस फिर खुला और विस्तृत सुनवाई के बाद यह फैसला आया।
🔵 राजनीति में फिर हलचल
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। यह मामला पहले से ही हाई-प्रोफाइल रहा है, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार का नाम जुड़ा हुआ है।
करीब 20 साल तक चले इस केस में आया यह फैसला न्यायिक प्रणाली की दृढ़ता को दर्शाता है। लंबे समय बाद आए इस निर्णय से यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में देर भले हो, न्याय संभव है।अगर चाहें तो मैं इसके लिए हेडलाइन विकल्प, फोटो कैप्शन, टैग्स और वेब वर्जन भी तैयार कर सकता हूँ।


