नीलकंठ की महिमा से गूंजा मुंगेली,गिरिबापु ने रच दिया अलौकिक वातावरण

मुंगेली – मुंगेली की शांत भूमि पर इन दिनों एक दिव्य माहौल गूंज रहा है, जहाँ आस्था की ध्वनि, भक्ति की लहर और शिव तत्व का अमृत एक साथ बह रहा है।

परम पूज्य गिरिबापु के श्रीमुख से हो रही श्री शिवकथा के तीसरे दिन गुरुवार को ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना, जिसने हर भक्त के मन को छू लिया।

कथा में गिरिबापु ने शिव के नीलकंठ स्वरूप, सर्व रूप, ब्रह्मा जी ने नारद को शिव कथा प्रसंग सुनाना,भक्तों पर कृपा के प्रसंगों को इतने सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि श्रोता केवल सुन नहीं रहे थे — वो हर प्रसंग को जी रहे थे।

“शिव वो नहीं जिन्हें हम बाहर खोजते हैं, शिव वो हैं जो भीतर मौन में बैठकर हमें जीवन का अर्थ समझाते हैं।

भजन की मधुर स्वर-लहरियों के बीच, जैसे-जैसे गिरिबापु शिवमहिमा का बखान करते गए, वैसे-वैसे वातावरण और भी भक्तिमय होता गया।


श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते रहे, कुछ की आँखों से अश्रु बह निकले तो कुछ मौन होकर भीतर ही भीतर शिव से जुड़ते रहे।


कथा के उपरांत सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण हुआ। आयोजन स्थल को दिव्य दीपों, फूलों और रूद्राक्षों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर कैलाश जैसा अनुभव दे रहा था।


कथा में मुंगेली ही नहीं, आसपास के गांवों व शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचे। कथा पंडाल से लेकर बाहर तक हर स्थान श्रद्धा से भरा हुआ था। आयोजन समिति की ओर से जलपान, बैठने और सुरक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है

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