
मुंगेली। करोड़ों की लागत से बना जिला अस्पताल अब खुद गंभीर सवालों के घेरे में है। बीती रात गर्भवती महिला को डॉक्टर न मिलने के कारण मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ा। यह घटना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई बयां करती है।

डॉक्टर नहीं मिले – नर्स बोली “सुबह 11 बजे आएंगे”
ठकुरिकापा निवासी पूजा सोनकर प्रसव पीड़ा की शिकायत पर रात करीब 1 बजे जिला अस्पताल पहुँचीं।परिजनों को उम्मीद थी कि जिला स्तर पर तत्काल चिकित्सीय सुविधा मिलेगी, लेकिन हालात उलट निकले।
अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
नर्स ने साफ कहा – “डॉक्टर सुबह 11 बजे आएंगे, तब तक इंतजार करें, या निजी अस्पताल ले जाएं।”
मजबूरी में निजी अस्पताल
पूजा सोनकर के परिवार ने रातभर इंतजार किया और कई डॉक्टरों को कॉल किया, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया।
सुबह 5 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं पहुँचा।आखिरकार परिजन पूजा को निजी अस्पताल ले गए, जहाँ सुबह 10 बजे उसने बच्ची को जन्म दिया।
सवालों के घेरे में जिला अस्पताल
नगर पालिका परिषद पार्षद प्रतिनिधि श्रवण सोनकर ने कहा –
“जब जिले का सबसे बड़ा अस्पताल ही रात को डॉक्टर विहीन है, तो गरीब मरीज आखिर जाएं तो कहाँ? क्या जिला अस्पताल सिर्फ नाम के लिए है?”
अस्पताल प्रबंधन का जवाब

जिला अस्पताल के डॉ. राय ने माना कि –
अस्पताल में केवल एक महिला रोग विशेषज्ञ पदस्थ हैं।
“इमरजेंसी में उन्हें बुलाया जाता है, लेकिन हर वक्त तुरंत पहुँचना संभव नहीं होता। दूसरी गाइनोकॉलजिस्ट की नियुक्ति के लिए प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन कोई आना ही नहीं चाहता।”
परिजनों का कहना है कि पूरे जिले का अस्पताल केवल एक गाइनोकॉलजिस्ट के भरोसे चलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऐसी स्थिति में प्रसूति जैसी आपातकालीन सेवाएं ठप हो जाती हैं।
इसका फायदा निजी अस्पताल उठाते हैं और मजबूरी में गरीबों से मोटी रकम वसूलते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यदि जिला अस्पताल ही रात में बंद दरवाज़े की तरह हो, तो गरीब मरीजों का क्या होगा?
“स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था इसे मजाक बना रही है।”
पूजा सोनकर का मामला केवल एक उदाहरण है।प्रतिदिन कई मरीज डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण सही समय पर उपचार नहीं पा रहे।
यह घटना एक बार फिर जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।


