
पथरिया। पथरिया जनपद पंचायत में वित्तीय अनियमितताएँ एक बार फिर उभरकर सामने आई हैं। सुशासन तिहार के नाम पर हुए करीब 16 लाख रुपये के गबन का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब पूर्व जनप्रतिनिधियों के मानदेय भुगतान में भारी देरी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पथरिया ब्लॉक की 96 ग्राम पंचायतों के पूर्व पंच, सरपंच और जनपद सदस्यों को पिछले आठ माह से चार महीने का मानदेय नहीं मिला है, जिसकी कुल राशि लगभग ₹46,28,000 बनती है। भुगतान में हुई इस देरी ने जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को युवा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल राजपूत और पथरिया पार्षद दीपक साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम रेखा चंद्रा से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने मुंगेली कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इसे गंभीर वित्तीय लापरवाही बताते हुए तत्काल मानदेय जारी करने की मांग की।
चार माह का मानदेय लंबित, 96 पंचायतों के प्रतिनिधि प्रभावित
ज्ञापन के अनुसार पथरिया विकासखंड में—
25 पूर्व जनपद सदस्य,
94 सरपंच,
1296 पंच
का मानदेय पिछले चार महीनों से अटका हुआ है।
शासन द्वारा निर्धारित मानदेय—
जनपद सदस्य : ₹5,000 प्रति माह
सरपंच : ₹4,000 प्रति माह
पंच : ₹500 प्रति माह
इन्हीं आधारों पर कुल बकाया राशि 46 लाख से अधिक बनती है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मार्च 2025 से नई पंचायतें कार्यरत हैं, बावजूद इसके पूर्व जनप्रतिनिधियों का मानदेय अब तक अटका हुआ है, जो प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण है।
“सेवा हमने दी, अपमान प्रशासन दे रहा है” – जनप्रतिनिधियों का आरोप
ग्राम कपूवा के पंच खेलावन पहाड़ी ने कहा—
“पंच ही गांव की रीढ़ होते हैं, पर मानदेय के नाम पर सबसे पीछे धकेल दिया गया। ₹500 प्रतिमाह कोई बड़ी रकम नहीं, फिर भी भुगतान न होना शर्मनाक है।”
पूर्व जनपद सदस्य रविप्रकाश वर्मा ने आरोप लगाया कि जनपद पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता खत्म हो चुकी है—
“पहले विकास निधि की रकम का गबन और अब मानदेय रोककर अधिकारों का हनन—ये सब मनमानी का परिणाम है। अधिकारियों से बार-बार आग्रह करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।”
राजनीतिक तेवर तेज, आंदोलन की चेतावनी
युवा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल राजपूत ने कहा—
“पथरिया जनपद की अनियमितताएँ जगजाहिर हैं। 16 लाख के गबन के बाद अब 46 लाख का मानदेय रोककर पूर्व जनप्रतिनिधियों को अपमानित किया जा रहा है। यदि जल्द मानदेय नहीं दिया गया तो बड़ा आंदोलन होगा।”
पार्षद दीपक साहू ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा—
“मानदेय रोकना किसी भी स्तर पर उचित नहीं है। 96 पंचायतों के प्रतिनिधियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। यदि भुगतान नहीं हुआ तो सड़क पर उतरने की नौबत आएगी।”
प्रदीप प्रधान (सीईओ जनपद पंचायत पथरिया) :
“जिला से जितना आबंटन प्राप्त हुआ है, उसके अनुसार राशि जारी की गई है।”
रेखा चंद्रा (एसडीएम पथरिया) :
“ज्ञापन प्राप्त हुआ है, संबंधित विभाग को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा।”
लगातार सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं—विकास निधि गबन और अब मानदेय रोकने—ने पथरिया जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिनिधियों का रोष और विपक्ष की सक्रियता ने मामले को और गरमा दिया है। अब जिले की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि वह कब तक बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर पाता है और जनप्रतिनिधियों का विश्वास बहाल हो पाता है।
ज्ञापन सौंपने वालों में राहुल राजपूत, दीपक साहू, रविप्रकाश वर्मा, खेलावन पहाड़ी, उदय कुमार मरकाम, मीना चंद्रकुमार नवरंग, पुष्पा शिवकुमार घृतलहरे, रुखमनी चंदन साहू, द्वारिका डहरिया सहित कई पूर्व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


