
मुंगेली। नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एफ.टी.सी.) मुंगेली ने पीड़िता के जीजा को दोषी ठहराते हुए कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
न्यायालय द्वारा 13 जनवरी 2026 को सुनाए गए निर्णय के अनुसार, आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) एवं धारा 6 के अंतर्गत आजीवन सश्रम कारावास तथा ₹2000-₹2000 के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
शासन की ओर से इस मामले में अधिवक्ता मोती लाल साहू ने पैरवी की। प्रकरण की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक रजनीकांत द्वारा पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों का न्यायालयीन कथन (गवाही) कुशलतापूर्वक कराया गया हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपी ने रिश्तों को कलंकित करते हुए नाबालिग के साथ गंभीर यौन अपराध किया था।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि ऐसे अपराध न केवल कानून बल्कि सामाजिक मूल्यों के भी विरुद्ध हैं और इनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं बरती जा सकती।
पीड़िता को मिलेगा 5 लाख रुपये का मुआवजा
न्यायालय ने पीड़िता की शारीरिक व मानसिक क्षति तथा पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इसमें से 1 लाख रुपये तत्काल पीड़िता के खाते में जमा किए जाएंगे, जबकि शेष 4 लाख रुपये पीड़िता के बालिग होने तक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा (FD) के रूप में रखे जाएंगे। जमा राशि पर प्राप्त ब्याज पीड़िता के अभिभावक नियमानुसार प्राप्त कर सकेंगे।
गोपनीयता और जेल आदेश
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़िता की पहचान से संबंधित नाम, पता, फोटो अथवा पारिवारिक जानकारी का किसी भी रूप में प्रकाशन नहीं किया जाएगा। दोषी को सजा भुगतने हेतु जिला जेल मुंगेली भेजने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही मुआवजा आदेश के अनुपालन हेतु निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित की गई है।


