
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में RJD की करारी हार के बाद पार्टी और लालू परिवार के भीतर उठ रही उथल-पुथल अब खुलकर सामने आने लगी है। इस राजनीतिक संकट का केंद्र बना है एक नाम— संजय यादव। तेजस्वी यादव के सबसे करीबी सलाहकार माने जाने वाले संजय पर अब परिवार के भीतर उंगलियां उठ रही हैं, खासकर तब जब तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने राजनीति और परिवार से दूरी बनाने का चौंकाने वाला ऐलान कर दिया।
रोहिणी का पोस्ट: राजनीति और परिवार से अलग होने की घोषणा
रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे ऐसा करने के लिए कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”

इस बयान ने RJD खेमे में तूफान ला दिया है। पहले से नाराज चल रहे तेज प्रताप के पार्टी छोड़ने और अब रोहिणी की इस घोषणा ने परिवार में बढ़ती दरार को और गहरा कर दिया है।
कौन हैं संजय यादव, जिन पर उठ रही हैं उंगलियां?
हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी संजय यादव की राजनीति में एंट्री तेजस्वी यादव से दोस्ती के बाद हुई। कंप्यूटर साइंस और MBA करने के बाद वे प्राइवेट सेक्टर में काम करते थे।
2012 के बाद से RJD में उनका कद लगातार बढ़ता गया और वे तेजस्वी के
रणनीतिक सलाहकार
मीडिया मैनेजर
भाषण लेखक
चुनावी फैसलों के केंद्र
बन गए।
2024 में वे राज्यसभा पहुंचे और तब तक RJD में उनकी पकड़ बेहद मजबूत हो चुकी थी। कई वरिष्ठ नेता उन्हें पार्टी फैसलों में “अत्यधिक दखल” देने वाला मानते रहे हैं।
हार के बाद बढ़ी नाराजगी
25 सीटों पर सिमटी RJD की हार के बाद कई लोगों ने पर्दे के पीछे संजय यादव की रणनीति को विफल बताया। तेज प्रताप पहले ही उन्हें “जयचंद” कह चुके हैं। अब रोहिणी के बयान ने आरोपों को और तेज कर दिया है।
RJD में नेतृत्व संकट?
रोहिणी के कदम के बाद अब बड़ा सवाल खड़ा है—
क्या RJD में असली संकट रणनीति का नहीं, बल्कि अंदरूनी फूट का है?
क्या लालू परिवार में नेतृत्व को लेकर टकराव चरम पर पहुंच चुका है?
क्या संजय यादव की बढ़ती ताकत ही परिवार और पार्टी के बीच तनाव की वजह है?
बिहार की राजनीति इस समय सबसे ज्यादा नजर RJD और लालू परिवार की ओर टिकाए हुए है। आने वाले दिनों में यह विवाद पार्टी की दिशा और भविष्य दोनों तय कर सकता है।


