
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्राथमिक कक्षाओं में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) को मजबूत बनाने हेतु जिले में तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण NCERT के निर्देशन, डाइट पेंड्रा के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा विभाग के सहयोग से विकासखंड लोरमी, पथरिया एवं मुंगेली के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को एफएलएन के सिद्धांतों, नई शिक्षण विधियों, गतिविधि आधारित सीखने और कक्षा में छात्र-केंद्रित शिक्षण के महत्व से परिचित कराना था, ताकि वे बच्चों को अधिक रोचक, सरल और प्रभावी तरीके से सीखने के लिए प्रेरित कर सकें।

14 नवंबर को होगा ‘एफएलएन मेला’
बाल दिवस के अवसर पर 14 नवंबर को जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में एफएलएन मेला का आयोजन किया जाएगा। इसमें बच्चे सीखने की विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन करेंगे। इसको लेकर विद्यालयों में जोर-शोर से तैयारियाँ जारी हैं।
मुंगेली विकासखंड में प्रशिक्षण व्यवस्था
मुंगेली विकासखंड में कुल 43 संकुलों को तीन जोन —
1. जरहांगाव
2. दाऊपारा मुंगेली
3. फास्टपुरमें विभाजित कर प्रशिक्षण सफलता पूर्वक संपन्न कराया गया।
मास्टर ट्रेनर बीआरजी दुर्गेश देवांगन ने बताया कि यह प्रशिक्षण आने वाले समय में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशिक्षण के संचालन में मास्टर ट्रेनर चंद्रशेखर उपाध्याय ने विषय-वस्तु को सरल, प्रभावी और व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया।
शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण को अत्यधिक उपयोगी बताया और कहा कि इससे कक्षा-कक्ष में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया और भी प्रभावी एवं परिणाममुखी होगी।

जिला एवं विकासखंड स्तर पर उल्लेखनीय योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डीआरजी अन्नपूर्णा सिंह परिहार, जितेंद्र वैष्णव, रामायण राजपूत तथा जिला प्रभारी मिल्लूराम यादव का विशेष योगदान रहा।
वहीं मुंगेली विकासखंड में बीआरजी गौकरण डिंडोले, गणेश गुप्ता, वर्षा चौरसिया, शाहीन परवीन, रविकांत पुरी, बृजेश्वर मिश्रा एवं एंजेल भारत का शिक्षण-निर्देशन मुख्य रूप से प्रभावी रहा।
प्रशिक्षण की शुरुआत विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री जे.के. बावरे के उद्बोधन से हुई तथा अंतिम दिवस का समापन बीआरसी सूर्यकांत उपाध्याय के मार्गदर्शन में हुआ।
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण ने न केवल शिक्षकों की समझ को मजबूत किया, बल्कि एफएलएन की अवधारणा को विद्यालयों में प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ है। आने वाले दिनों में इस दिशा में निरंतर नवाचार और आयोजन जारी रहेंगे।


