
सिल्ली पंचायत में सरपंच-सचिव पर मनमानी का आरोप, 30-35 गांवों पर पर्यावरणीय असर की आशंका
मुंगेली (छत्तीसगढ़)।जिले के ग्राम पंचायत सिल्ली में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामवासियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि सरपंच और सचिव द्वारा ग्राम सभा की अनुमति के बिना ही एथेनॉल प्लांट के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी कर दी गई है। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए तत्काल निरस्त करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा में सर्वसम्मति से एथेनॉल प्लांट के प्रस्ताव का विरोध किया गया था और इसे निरस्त करने का निर्णय लिया गया था। बावजूद इसके पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने ग्राम सभा के निर्णय को दरकिनार कर NOC जारी कर दी, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि पंचायत राज अधिनियम के तहत किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट, विशेषकर एथेनॉल प्लांट जैसे प्रकल्प के लिए NOC देने का अधिकार ग्राम सभा के पास सुरक्षित होता है। बिना ग्राम सभा की सहमति के इस प्रकार का निर्णय लेना नियमों का उल्लंघन है।
मनमानी और पारदर्शिता पर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच और सचिव ने ग्राम पंचायत की नियमित बैठक और ग्राम सभा बुलाए बिना ही मनमाने ढंग से NOC जारी कर दी। इससे पंचायत की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पर्यावरण और जनजीवन पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट से आसपास के 30-35 गांवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। प्लांट के संचालन से जल स्तर गिरने, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण बढ़ने और पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई गई है। साथ ही भारी बिजली खपत के चलते क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध NOC को निरस्त कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
एथेनॉल प्लांट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों की एकजुटता और विरोध को देखते हुए प्रशासन पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।


