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महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण, लेकिन छत्तीसगढ़ महतारी को भूले जिम्मेदार!

मुख्यमंत्री के दौरे में करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात, मगर प्रदेश की अस्मिता मानी जाने वाली प्रतिमा की उपेक्षा पर उठे सवाल

मुंगेली। सुशासन तिहार 2026 के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुंगेली दौरे को लेकर पूरे जिले में भव्य तैयारियां की गई थीं। शहर के चौक-चौराहों को सजाया गया, स्वागत बैनर लगाए गए और करोड़ों रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री ने नगर में स्थापित महापुरुषों और संतों की प्रतिमाओं का अनावरण कर माल्यार्पण भी किया, लेकिन पूरे कार्यक्रम के बीच एक ऐसी चूक सामने आई जिसने लोगों के बीच नाराजगी और चर्चा दोनों बढ़ा दी।

मुख्यमंत्री साय ने कलेक्ट्रेट परिसर के पास डॉ. भीमराव अंबेडकर, दाऊपारा में बाबा गुरु घासीदास, पड़ाव चौक में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और रायपुर रोड तिराहा में भक्त माता कर्मा की प्रतिमाओं का अनावरण कर उन्हें नमन किया। अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक समरसता, समानता, राष्ट्रभक्ति, सेवा और संस्कारों का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नई पीढ़ी को महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

लेकिन इसी दौरान लोगों की नजर उस बात पर भी गई, जिसे लेकर अब शहरभर में सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री का काफिला जिस मार्ग से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचा, उसी रास्ते में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के सामने न तो माल्यार्पण हुआ और न ही वहां रुककर श्रद्धांजलि दी गई। इसे लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं में नाराजगी देखी जा रही है।

लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ महतारी केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पहचान, संस्कृति और गौरव की प्रतीक है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उसकी अनदेखी होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि पिछले एक सप्ताह से नेता, अधिकारी और प्रशासनिक अमला दिनभर उसी रास्ते से गुजरता रहा, लेकिन किसी को यह ध्यान नहीं आया कि प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई और व्यवस्था भी कराई जाए।

स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि “कार्यक्रम के दिन माल्यार्पण कर फोटो खिंचवाना आसान है, लेकिन बाद में प्रतिमाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं होता।” लोगों का कहना है कि महापुरुषों और प्रदेश की अस्मिता से जुड़ी प्रतिमाओं का सम्मान केवल आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नियमित देखरेख और सम्मान भी जरूरी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ लोग इसे स्थानीय भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक चूक मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जनता इस तरह की बातों को गंभीरता से देखती है, क्योंकि यह सीधे प्रदेश की संस्कृति और भावनाओं से जुड़ा विषय है।

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