
स्वागत पोस्टरों ने बढ़ाई अंदरूनी खींचतान की चर्चा, कार्यकर्ताओं ने संगठन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मुंगेली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 10 मई के प्रस्तावित मुंगेली दौरे से पहले शहर में लगे स्वागत पोस्टर और बैनर अब भाजपा की अंदरूनी राजनीति का नया केंद्र बन गए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, मुख्य मार्गों और कार्यक्रम स्थलों पर लगाए गए बैनरों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय नेतृत्व, केंद्रीय राज्य मंत्री, प्रभारी मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को प्रमुखता से जगह दी गई है, लेकिन प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा समेत कई स्थानीय वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें नदारद दिखने से संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है।
कार्यकर्ताओं में नाराजगी, समर्थकों ने पूछा- क्या जमीनी नेता सिर्फ चुनाव तक सीमित?
पोस्टरों से बड़े नेताओं के गायब होने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्वागत जैसे बड़े आयोजन में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी केवल साधारण भूल नहीं मानी जा सकती। खासकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा की तस्वीरों का अधिकांश बैनरों से गायब रहना उनके समर्थकों के बीच चर्चा और असंतोष का कारण बना हुआ है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के समय जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के दम पर पार्टी मजबूती से खड़ी दिखाई देती है, सत्ता मिलने के बाद उन्हीं जमीनी चेहरों को किनारे कर देना संगठन के भीतर गलत संदेश देता है। उनका मानना है कि भाजपा में पोस्टर और बैनर केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि संगठन में राजनीतिक महत्व और प्रभाव का प्रतीक भी माने जाते हैं।
“तकनीकी गलती” या अंदरूनी सियासत?
हालांकि पार्टी के कुछ पदाधिकारी इसे पोस्टर डिजाइनिंग और समन्वय की कमी से जुड़ी तकनीकी चूक बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग ही चर्चाएं चल रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि यदि यह केवल तकनीकी गलती थी तो शहरभर में लगे अधिकांश पोस्टरों में एक जैसी “चूक” आखिर कैसे दिखाई दी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर संगठन के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन, गुटबाजी और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को उजागर करती हैं। मुंगेली भाजपा में लंबे समय से अलग-अलग गुटों की सक्रियता की चर्चा रही है और अब यह पोस्टर विवाद उन चर्चाओं को और हवा देता नजर आ रहा है।
पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद
यह पहला मामला नहीं है जब भाजपा की प्रचार सामग्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के एक कार्यक्रम में भी कई वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें प्रचार सामग्री से गायब होने पर संगठन के भीतर नाराजगी सामने आई थी। उस समय भी कार्यकर्ताओं ने इसे “जानबूझकर की गई अनदेखी” बताया था।
अब मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले फिर उसी तरह की स्थिति बनने से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि स्थानीय भाजपा की अंदरूनी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है।
संगठन की चुप्पी से बढ़ीं अटकलें
पूरे मामले में भाजपा संगठन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही वजह है कि शहर में तरह-तरह की चर्चाएं और राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। अब सवाल यह उठने लगे हैं कि आखिर मुंगेली भाजपा में किन नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है और किन चेहरों को धीरे-धीरे हाशिये पर डालने की तैयारी चल रही है।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले शुरू हुई यह “पोस्टर पॉलिटिक्स” आने वाले दिनों में मुंगेली भाजपा के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों और शक्ति संतुलन की बड़ी तस्वीर भी दिखा सकती है।


