मुंगेली को बजट में किया नजरअंदाज, कांग्रेस ने जताया विरोध, भाजपा ने सराहा



मुंगेली। राज्य सरकार के बजट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां कांग्रेस ने मुंगेली जिले को नजरअंदाज किए जाने पर नाराजगी जताई, वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी और समावेशी बजट बताया।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप



मुंगेली कांग्रेस जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि “जब जिले में केंद्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, तब भी मुंगेली को उचित बजट नहीं मिला। यह जिले की जनता के साथ धोखा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विकास कार्यों के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई।

भाजपा ने बजट को बताया ऐतिहासिक



भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष सौरभ बाजपाई ने कहा कि “यह बजट युवाओं और किसानों के हित में है। कृषि महाविद्यालय और स्टेडियम की सौगात जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।”


भाजपा युवा मोर्चा के महामंत्री अमितेश आर्य ने कहा कि “बजट सभी वर्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और जनकल्याण योजनाओं को गति देने वाला यह बजट आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम है।”



भाजपा जिला उपाध्यक्ष शिव प्रताप सिंह ने भी बजट की सराहना करते हुए कहा कि “युवाओं के कौशल विकास, स्टार्टअप और सरकारी नौकरियों में नई भर्तियों का प्रावधान किया गया है। किसानों को राहत देने के लिए कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाया गया है।”

कृषि क्षेत्र के लिए ठोस योजना नहीं – पूर्व मंडी अध्यक्ष



पूर्व मंडी अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्रिय ने कहा कि “बजट में 1.5 करोड़ मीट्रिक टन धान खरीद का जिक्र किया गया, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुधारने या कर्ज माफी पर कोई ठोस योजना नहीं दी गई।” उन्होंने कहा कि “मौसम जोखिम, वैकल्पिक फसलें और नई तकनीकों को अपनाने पर भी ध्यान नहीं दिया गया।”

मेट्रो योजना पर उठे सवाल



नगर पालिका परिषद मुंगेली के अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने कहा कि “रायपुर से दुर्ग तक मेट्रो रेल की योजना आकर्षक लग सकती है, लेकिन क्या छत्तीसगढ़ को इसकी जरूरत है? जब ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और परिवहन सुविधाएं कमजोर हैं, तो मेट्रो की प्राथमिकता पर सवाल उठते हैं।”

ई-गवर्नेंस के लिए अपर्याप्त बजट – पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष



पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हेमेंद्र गोस्वामी ने कहा कि “ई-गवर्नेंस के लिए मात्र 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो इतने बड़े राज्य के लिए अपर्याप्त है।” उन्होंने सरकार की डिजिटल न्यायालय, स्टेट डाटा सेंटर और हेल्पलाइन की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि “इनके लिए पर्याप्त संसाधन ही नहीं दिए गए हैं।”

“विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम” – भाजपा



पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष शैलेश पाठक ने कहा कि “यह बजट राज्य को आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सभी वर्गों की आवश्यकताओं को संतुलित रूप से पूरा करने का प्रयास किया गया है।”

अब सवाल यह है कि बजट को लेकर उठे यह मुद्दे क्या वाकई सरकार के लिए चुनौती बनेंगे या फिर यह सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहेंगे?

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