
मुंगेली। कहने को तो खनिज विभाग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष है मगर खनिज विभाग मुंगेली जिले में प्रभावी नजर नहीं आ रहा है। आधा दर्जन से भी कम कुल स्टाफ में संचालित मुंगेली का खनिज विभाग किसी कार्यवाही की बजाय अपने विभाग के दफ्तर तक ही सिमटा हुआ है। मुंगेली जिले में खनिज संसाधन अंतर्गत रेत,गिट्टी अवैध परिवहन तो आम बात है मिट्टी की खुदाई गांव गांव बिना रोक टोक जारी है इसके अलावा अब लोगों की इतनी हिमाकत देखने मिल रही है कि नदी के दोनों तरफ बांध कर बीच नदी में पोकलैंड लगाकर अवैध उत्खनन किया जा रहा है बावजूद जिला प्रशासन कुम्भकरणीय नींद में सोया हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के विभाग और अवैध उत्खनन पर पूरे राज्य में मानो कठोर कार्यवाही के लिए इस समय विशेष अभियान चलाया जा रहा है वहीं मुंगेली जिले में यह कार्यवाही प्रभावी नजर नहीं आ रही है ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी अनेक सवाल और संदेह को स्वमेव स्पष्ट कर रही है।
चर्चा यह भी है कि माइनिंग विभाग का एक अवैतनिक वाहन चालक जो कि वर्षों से अवैध उत्खनन की मुखबिरी और उन्हें विभागीय कार्यवाही से बचाने समय पूर्व सूचना देने का ही काम करता है जिसके कारण कभी कभार खनिज विभाग की टीम छापेमारी में पहुंचती भी है तब विभागीय भस्मासुर लोगों के मुखबिरी के चलते बिना कार्यवाही ही लौट जाती है। जिले के अवैध उत्खनन को लेकर ऐसा भी नहीं है कि कलेक्टर के पास स्वयं शिकायत ना मिल रही हो मगर उनके द्वारा भी शायद खनिज विभाग को निर्देशित करने का ही काम बखूबी निभाया जा रहा है जिसके बाद कोई कार्यवाही नजर नहीं आ रही है।
सूत्र बता रहे है कि इन सब को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में इस बार जागरूक लोगों द्वारा जनदर्शन स्थगित करवाकर या रोककर जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को अवैध उत्खनन दिखाने सीधे मौके में ले जाने के लिए हल्ला बोल करने की योजना बनाई गई है तब हो सकता है जिला प्रशासन अपने आंख के समक्ष लोगों के धरना,आंदोलन जैसी नौबत से बचने बड़ी कार्यवाही की जा सकती है।
बहरहाल वर्तमान में बड़े बड़े इक्यूपमेंट लगाकर एनजीटी के नियमों को ताक में रख लोग मुंगेली जिले में बीच नदी के भीतर से भी अवैध उत्खनन दिन रात कर रहे हैं और जिला प्रशासन मौन मूकदर्शक मुद्रा में ही है।


