
मुंगेली। जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध उत्खनन और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर उठ रही आवाज़ों का असर अब दिखने लगा है। खबरों में लगातार उजागर हो रही लापरवाही और बीच नदी में हो रहे खुलेआम उत्खनन के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।
पहले जहां खनिज विभाग की निष्क्रियता के चलते पूरे जिले में रेत, गिट्टी और मिट्टी का अवैध उत्खनन बेखौफ जारी था, वहीं अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि नदी के बीचों-बीच बांध बनाकर पोकलेन मशीनों से खुदाई की जा रही थी और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ था। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और विभागीय मिलीभगत की चर्चाओं ने भी मामले को और तूल दिया।

सूत्रों के अनुसार, अवैध उत्खनन को लेकर आमजन में भारी आक्रोश था और कलेक्टर जनदर्शन में विरोध-प्रदर्शन की तैयारी भी की जा रही थी। इसके चलते प्रशासन पर दबाव बढ़ा और अब कार्रवाई जमीन पर नजर आने लगी है।
इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम अमरटापू क्षेत्र में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान शासकीय भूमि से अवैध उत्खनन करते हुए एक पोकलेन मशीन और 3 हाइवा वाहनों को मौके से जब्त किया गया। टीम ने तत्काल उत्खनन कार्य बंद करवाते हुए संबंधित वाहन संचालकों के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम अजय शतरंज सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि जिले में अवैध उत्खनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ लगातार जारी रहेंगी।
👉 अब बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अवैध उत्खनन की सूचना लीक कर कार्रवाई को विफल करने वाले तथाकथित ‘मुखबिरों’ पर भी कार्रवाई होगी?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग के अंदर से ही जानकारी लीक होने के कारण कई बार छापेमारी निष्फल हो जाती थी। ऐसे में यदि प्रशासन इस पहलू पर सख्ती नहीं दिखाता, तो अवैध उत्खनन पर लगाम लगाना मुश्किल बना रहेगा।
बहरहाल, यह कार्रवाई जहां एक ओर “खबर का असर” मानी जा रही है, वहीं अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशासन जड़ तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करता है या नहीं।



