
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस द्वारा किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर पूरे प्रदेश में चलाए गए आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। खाद-बीज की कमी, प्रति एकड़ खाद वितरण में कटौती और जटिल टोकन प्रणाली को लेकर किसानों के लगातार विरोध के बीच सरकार ने टोकन व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने घोषणा करते हुए कहा कि अब किसान सहकारी समितियों से बिना किसी टोकन के अपने बोए गए रकबे के अनुसार खाद प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही कृत्रिम रूप से खाद की कमी पैदा कर कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए आवश्यक होने पर सीधे एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी बात कही है।
किसान कांग्रेस ने इसे किसानों की जीत बताया
अभिषेक मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला किसानों के संगठित संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में किसानों की समस्याओं को लेकर किए गए आंदोलन और प्रशासन तक पहुंचाई गई आवाज के बाद सरकार को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर संगठन का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
आत्मा सिंह क्षत्रिय, प्रभारी महामंत्री (प्रशासनिक), छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस ने कहा कि किसान कांग्रेस लगातार यह मांग उठा रही थी कि खाद वितरण की प्रक्रिया सरल और किसानों के हित में हो। उन्होंने कहा कि संगठन ने प्रदेशभर में किसानों के साथ खड़े होकर उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज सामने आया है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि किसानों के बाकी लंबित मुद्दों का भी जल्द समाधान होना चाहिए।
सरकार के प्रमुख फैसले
- खाद वितरण के लिए लागू टोकन व्यवस्था समाप्त।
- किसानों को रकबे के अनुसार सीधे खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
- खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और एफआईआर के निर्देश।
- नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश।
किसान कांग्रेस ने इसे प्रदेश के अन्नदाताओं की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि किसानों के शेष मुद्दों के समाधान तक संगठन किसानों की आवाज बुलंद करता रहेगा।


