शुष्क दिवस पर जागा आबकारी विभाग, सवाल—बाकी दिनों में शराब क्या छुट्टी पर रहती है?

लेख | मुंगेली

शुष्क दिवस आया तो आबकारी विभाग भी जाग गया। गाड़ियां दौड़ीं, जांच शुरू हुई, मोटरसाइकिल पकड़ी गई, 102 पाव शराब बरामद हुई और फिर कार्रवाई की खबर बाकायदा जारी कर दी गई। आरोपी जेल पहुंच गया और विभाग की पीठ भी थपथपा दी गई।

लेकिन यहां कहानी खत्म नहीं होती, बल्कि असली सवाल यहीं से शुरू होता है।

आखिर शराब तो सिर्फ शुष्क दिवस पर ही नहीं बिकती!

अगर 15 अगस्त को विभाग को सड़क पर जाती मोटरसाइकिल में 102 पाव शराब दिखाई दे सकती है, तो फिर सामान्य दिनों में यही शराब नजर क्यों नहीं आती? क्या आबकारी विभाग की नजर भी शुष्क दिवस के साथ ही खुलती है और अगले दिन फिर आराम करने चली जाती है?

शुष्क दिवस पर कार्रवाई होना अच्छी बात है। कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का कैलेंडर भी शुष्क दिवस देखकर चलता है?

मुंगेली जिले में आम दिनों में भी अवैध शराब की बिक्री को लेकर चर्चाएं और शिकायतें सुनने को मिलती रहती हैं। गांवों से लेकर शहर के आसपास तक शराब आसानी से उपलब्ध होने की बातें अक्सर सामने आती हैं। ऐसे में 15 अगस्त को हुई एक कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि बताने से ज्यादा जरूरी है यह देखना कि बाकी 364 दिन विभाग की कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है।

मजेदार बात तो यह है कि शुष्क दिवस पर विभाग को होटल, ढाबे, गुमटी और संदिग्ध ठिकाने सब याद आ जाते हैं। टीम भी सक्रिय, वाहन जांच भी सक्रिय और कार्रवाई भी सक्रिय। ऐसा लगता है जैसे शुष्क दिवस आते ही विभाग के भीतर भी अचानक “एक्शन मोड” ऑन हो जाता है।

जनता के मन में शायद यही सवाल है—

“साहब, 15 अगस्त को शराब पकड़ने की इतनी जल्दी थी, अच्छी बात है… लेकिन 16 अगस्त से फिर सब सामान्य तो नहीं हो जाएगा?”

क्योंकि शराब बेचने वाला व्यक्ति यह नहीं देखता कि आज स्वतंत्रता दिवस है, सोमवार है या मंगलवार। अगर अवैध कारोबार हो रहा है तो वह किसी भी दिन हो सकता है। फिर कार्रवाई भी किसी एक दिन की मेहमान क्यों हो?

विभाग यदि वास्तव में अवैध शराब पर अंकुश लगाना चाहता है तो शुष्क दिवस की तरह ही सामान्य दिनों में भी लगातार छापामार कार्रवाई, नियमित वाहन जांच और संदिग्ध ठिकानों की निगरानी जरूरी है।

वरना हर साल शुष्क दिवस पर एक-दो कार्रवाई होगी, प्रेस नोट जारी होगा, “बड़ी कार्रवाई” की सुर्खियां बनेंगी और जनता फिर वही सवाल पूछेगी—

“शराब तो रोज बिकती है साहब, फिर कार्रवाई भी रोज क्यों नहीं?”

शुष्क दिवस पर कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षा शुष्क दिवस के बाद शुरू होती है। पीठ थपथपाने से ज्यादा जरूरी है कि विभाग अपनी पीठ के पीछे चल रहे अवैध शराब के कारोबार पर नजर रखे।

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