
मुंगेली। जिले के फास्टरपुर क्षेत्र में प्रस्तावित मल्टी इंटीग्रेटेड प्लांट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन तिवारी ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना के शुरू होने से आसपास के लगभग 20 गांवों में पेयजल, निस्तारी और कृषि सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने बताया कि फास्टरपुर क्षेत्र में हर साल फरवरी से जून के बीच अधिकांश बोरवेल सूख जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। क्षेत्र में न तो कोई प्रमुख नदी है और न ही पर्याप्त नहर या जलस्रोत, जिससे भूजल स्तर का पुनर्भरण हो सके। ऐसे में बड़े औद्योगिक संयंत्र के लिए भारी मात्रा में पानी का दोहन पूरे इलाके को जल संकट की ओर धकेल सकता है।
जानकारी के अनुसार, कैथ नवागांव में आर.एस.एल.डी. बायोफ्यूल्स प्रा.लि. द्वारा 600 केएलडी क्षमता का रेक्टिफाइड स्प्रिट डिस्टिलरी, एथेनॉल प्लांट और 12 मेगावाट विद्युत उत्पादन इकाई स्थापित की जा रही है। इन संयंत्रों के संचालन के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिसे भूगर्भ से निकाला जाएगा। तिवारी का कहना है कि इससे 20 किलोमीटर के दायरे में जलस्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सभी को आगे आकर जनहित में आवाज उठानी चाहिए। साथ ही प्लांट प्रबंधन से आग्रह किया कि संयंत्र को ऐसे क्षेत्र में स्थापित किया जाए, जहां पानी के पर्याप्त प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध हों।
तिवारी ने यह भी चेतावनी दी कि 17 नवंबर 2025 को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में कई अनियमितताएं हुई हैं। इस मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जल्द ही जनसंपर्क अभियान चलाकर स्थिति का आकलन किया जाएगा।


