
मुंगेली। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग और मुंगेली के गुरुकृपा मोबाइल दुकान में हुई आगजनी की घटना के बाद शहर में अग्नि सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। चाय की दुकानों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों के बीच यही चर्चा है कि आखिर प्रशासन और अग्निशमन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं।
चर्चा के दौरान नागरिकों ने कहा कि मुंगेली में बड़ी संख्या में आवासीय भवन अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तब्दील हो चुके हैं। कोचिंग सेंटर, जिम, अस्पताल, कपड़ा दुकान, मोबाइल शॉप, कॉम्प्लेक्स और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है, लेकिन अधिकांश जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा संसाधनों का अभाव है।
लोगों का कहना है कि शहर की लगभग 90 प्रतिशत व्यावसायिक इमारतों में आग से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। ऐसे में यदि किसी भवन में आग लगती है तो शुरुआती समय में उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
चाय पे चर्चा में शामिल लोगों ने सवाल उठाया कि जब दुकानों और संस्थानों के लिए विभिन्न प्रकार के लाइसेंस और अनुमति आवश्यक हैं, तो अग्नि सुरक्षा प्रमाणन को सख्ती से लागू क्यों नहीं किया जा रहा। नागरिकों ने मांग की कि अग्निशमन विभाग, नगर पालिका और प्रशासन संयुक्त रूप से शहर के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराएं।
चर्चा में यह भी मत सामने आया कि जिन प्रतिष्ठानों में आग बुझाने के यंत्र और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, उन्हें पहले नोटिस देकर निर्धारित समय सीमा में व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं होने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आग बुझाने का यंत्र होने से शुरुआती आग को तुरंत नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे बड़ी दुर्घटना और जनहानि को रोका जा सकता है। वहीं सुरक्षा उपकरणों के अभाव में छोटी घटना भी कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले सकती है।
चाय पे चर्चा में लोगों की राय रही कि प्रशासन को हादसों के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले से तैयारी और निगरानी पर जोर देना चाहिए। लखनऊ और मुंगेली की घटनाएं चेतावनी हैं कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों को लागू नहीं किया गया तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे सामने आ सकते हैं।
☕ चाय पे चर्चा का निष्कर्ष:
“फायर सेफ्टी कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने की पहली सुरक्षा दीवार है। प्रशासन को आज कार्रवाई करनी होगी, ताकि कल किसी परिवार को अपूरणीय क्षति न झेलनी पड़े।”
— छत्तीसगढ़ टाइम्स न्यूज़
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