
आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान हादसा: मौत के बाद सरकारी वाहन के दस्तावेजों पर उठे सवाल
मुंगेली। लोरमी क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान हुए सड़क हादसे में एक नाबालिग की मौत और दो बच्चों के घायल होने के बाद अब विभागीय वाहन के दस्तावेजों, बीमा और वैधानिक स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग की टीम अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर लौट रही थी, तभी बैगाकापा के पास दुर्घटना हो गई। हादसे में 12 वर्षीय अंकित यादव की मौत हो गई, जबकि दो अन्य नाबालिग बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।

इधर सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि जिस वाहन से दुर्घटना हुई, उसका बीमा दुर्घटना के समय समाप्त हो चुका था। आरोप यह भी है कि हादसे के बाद वाहन का बीमा कराया गया। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि बीमा प्रक्रिया के दौरान समान मॉडल की दूसरी गाड़ी पर सीजी 10 एवी 4328 नंबर अंकित कर दस्तावेज तैयार किए गए। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में एक और बड़ा सवाल वाहन की वैधानिक स्थिति को लेकर उठ रहा है। परिवहन नियमों के अनुसार सरकारी वाहनों में निर्धारित सरकारी नंबर श्रृंखला होती है, जबकि विभागीय कार्य में संलग्न निजी अथवा अटैच वाहनों के लिए भी स्पष्ट नियम तय हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई निजी वाहन सरकारी कार्य में लगाया गया था तो उसके सभी दस्तावेज, परमिट और निर्धारित मानकों की जांच आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार जब संबंधित आबकारी अधिकारियों से वाहन के दस्तावेज, वेंडर और वैध कागजातों के संबंध में जानकारी चाही गई तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि केवल इस मामले तक सीमित रहने के बजाय जिले में विभिन्न विभागों में संचालित सरकारी एवं अटैच वाहनों की व्यापक जांच होनी चाहिए। मांग की जा रही है कि यातायात पुलिस और परिवहन विभाग कलेक्टोरेट परिसर में विशेष शिविर लगाकर सभी विभागीय वाहनों के बीमा, फिटनेस, परमिट, पंजीयन और अन्य दस्तावेजों की जांच करें तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करें।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नाबालिग की मौत के बाद सामने आए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं? क्या वाहन के दस्तावेजों और बीमा संबंधी तथ्यों की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी, या फिर मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा? इसका जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट ही दे पाएगी।


