
गिगतरा गांव में ट्रैक्टर से कुचलकर की गई थी भागबली पाटले की हत्या, 23 गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपी दोषी सिद्ध

मुंगेली, 20 जुलाई। फास्टरपुर थाना क्षेत्र के गिगतरा गांव में भूमि विवाद को लेकर हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी आठ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश गिरिजा देवी मरावी के न्यायालय ने सत्र प्रकरण क्रमांक 01/2025 में सोमवार को निर्णय सुनाते हुए अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों को विश्वसनीय मानते हुए सभी आरोपियों को दोषसिद्ध ठहराया।
न्यायालय ने केजूराम पाटले, चित्रलेखा पाटले, मीनाक्षी पाटले, रजनी पाटले, रामबली पाटले, लाला उर्फ जागेंद्र कुर्रे, माखन पाटले एवं तोरण पाटले को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(3), 61(2)(क), 103(1) सहपठित धारा 190 (दो बार) तथा धारा 115(2) सहपठित धारा 190 (दो बार) के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

भूमि विवाद ने लिया खूनी रूप
अभियोजन के अनुसार थाना फास्टरपुर के अपराध क्रमांक 72/2024 में दर्ज यह घटना 25 अगस्त 2024 को दोपहर लगभग 2 बजे ग्राम गिगतरा में हुई थी। पारिवारिक भूमि विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना के दौरान आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से हमला किया। अभियुक्तों ने ट्रैक्टर से भागबली पाटले को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। वहीं वकील पाटले की भी निर्मम हत्या कर दी गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना पूरी करते हुए न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
23 गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में 23 गवाहों के बयान, दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दो रक्षा गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की विस्तृत बहस और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।
न्यायालय की मार्मिक टिप्पणी

निर्णय में न्यायालय ने कहा कि यह प्रकरण इस कटु सत्य का साक्षी है कि जब भूमि का लोभ मानवीय संवेदनाओं पर हावी हो जाता है तो पिता-पुत्र, भाई-भाई और परिवार की समस्त मर्यादाएं रक्तरंजित हो जाती हैं। कुछ भूमि के लिए अपने ही रक्त संबंधियों का जीवन समाप्त कर देना केवल व्यक्तियों की हत्या नहीं, बल्कि परिवार जैसी संस्था के मूल्यों की भी हत्या है।
न्यायालय ने कहा कि जिस भूमि पर परिवार का भविष्य संवरना था, उसी भूमि के विवाद ने पूरे परिवार का वर्तमान और भविष्य उजाड़ दिया। पिता के सामने पुत्रों का रक्त बहा, भाइयों ने भाइयों का जीवन छीन लिया और परिवार की महिलाएं भी इस त्रासदी की सहभागी बनीं।
निर्णय में यह भी कहा गया कि इस जघन्य अपराध का दुष्परिणाम केवल दो व्यक्तियों की मृत्यु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मृतकों की पत्नियां असमय वैधव्य का जीवन जीने को विवश हुईं तथा उनके बच्चे जीवनभर पिता के स्नेह और संरक्षण से वंचित हो गए। कानून किसी का जीवन वापस नहीं लौटा सकता, लेकिन ऐसा दंड आवश्यक है जिससे समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे और यह स्पष्ट संदेश जाए कि संपत्ति की लालसा में मानवता की हत्या करने वालों के प्रति कानून कभी उदार नहीं हो सकता।
मृतकों के परिजनों को मिलेगी पीड़ित क्षतिपूर्ति
न्यायालय ने सुरेश बनाम हरियाणा राज्य, 2015 (1) एससीसी 461 के न्यायादृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। न्यायालय ने पाया कि मृतक भागबली पाटले एवं वकील पाटले के निधन से उनके परिवारों के समक्ष भरण-पोषण की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने दोनों मृतकों की पत्नियों को जांच उपरांत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि से प्रतिकर राशि प्रदान किए जाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुंगेली को अनुशंसा की है।

लोक अभियोजक ने की प्रभावी पैरवी
प्रकरण में शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने संपूर्ण पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों, गवाहों एवं कानूनी पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन की सशक्त पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आठ आरोपियों को दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


